दिल्ली। (SPK न्यूज़ 24) दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार पाँच मुस्लिम युवकों को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में दिल्ली पुलिस की जाँच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की जाँच यांत्रिक तरीके से की गई और निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फँसाया गया।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 11 दिसंबर को सुनाए गए फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल एक गवाह की गवाही, जब अन्य गवाह अविश्वसनीय हों, आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती।बरी किए गए युवकों में अब्दुल सत्तार, आरिफ़, मोहम्मद ख़ालिद, हनीन और तनवीर अली उर्फ़ गुल्लू शामिल हैं। मोहम्मद ख़ालिद और तनवीर अली की ओर से जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी** के निर्देश पर एडवोकेट सलीम मलिक ने पैरवी की।अदालत ने अपने फैसले में यह भी रेखांकित किया कि आपराधिक मामलों में जाँच एजेंसियों की ज़िम्मेदारी होती है कि वे निष्पक्ष, गहन और साक्ष्यों के आधार पर जाँच करें, न कि केवल संदेह या अनुमान के आधार पर किसी को आरोपी बनाएं।इस फैसले को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ कई मामलों में जाँच की निष्पक्षता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
