का सख्त रुख, अब CJM कोर्ट करेगी सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग

प्रयागराज। पुलिस थानों में पारदर्शिता बढ़ाने और हिरासत में होने वाली घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से Allahabad High Court ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब जिले की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग और निरीक्षण करेगी। इस फैसले को कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था पहले से मौजूद है, लेकिन कई स्थानों पर इनकी नियमित निगरानी नहीं होने से उनका उद्देश्य पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अदालत ने यह व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं कि जिला स्तर पर CJM कोर्ट समय-समय पर इन कैमरों की स्थिति, कार्यप्रणाली और रिकॉर्डिंग की जांच करेगी।

अदालत का मानना है कि पुलिस हिरासत के दौरान होने वाली घटनाओं, दुर्व्यवहार या किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है। सीसीटीवी कैमरों की प्रभावी निगरानी से थानों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी होगी और आम नागरिकों का पुलिस व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा।

निर्देश के अनुसार अब जिले के सभी पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। यदि किसी थाने में कैमरे खराब पाए जाते हैं या रिकॉर्डिंग व्यवस्था सही तरीके से नहीं चल रही होती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर तय की जाएगी। CJM कोर्ट इन मामलों में रिपोर्ट तैयार कर उच्च न्यायालय को भी अवगत करा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला पुलिस प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। इससे न केवल हिरासत में होने वाली घटनाओं पर नियंत्रण लगेगा बल्कि पुलिस और जनता के बीच पारदर्शिता भी बढ़ेगी। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति के साथ थाने में अनुचित व्यवहार होता है, तो सीसीटीवी फुटेज एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आ सकता है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी स्वतंत्र और न्यायिक व्यवस्था के अंतर्गत होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके।

हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब प्रदेश के विभिन्न जिलों में CJM कोर्ट द्वारा पुलिस थानों की सीसीटीवी व्यवस्था की निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इससे पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और हिरासत में होने वाली संदिग्ध घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

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