कानपुर।छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर (सीएसजेएमयू) की शैक्षणिक साख और प्रशासनिक छवि इन दिनों अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर सवालों के घेरे में है। छात्रों, शिक्षकों और संबद्ध महाविद्यालयों से लगातार मिल रही शिकायतों के कारण विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा प्रभावित होती नज़र आ रही है।विश्वविद्यालय से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य समय पर पूरे न होने, परीक्षा परिणामों में देरी, अंकपत्र एवं डिग्री वितरण में लापरवाही तथा शिकायत निवारण प्रणाली के प्रभावी न होने जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं। इससे न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, कई बार छात्र और महाविद्यालय प्रशासन अपनी समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब या समाधान नहीं मिल पाता। पारदर्शिता की कमी और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता को लेकर भी लगातार असंतोष व्यक्त किया जा रहा है।शिक्षाविदों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक सुधार नहीं किए गए, तो विश्वविद्यालय की वर्षों से बनी प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान हो सकता है। एक वरिष्ठ शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “विश्वविद्यालय की पहचान केवल भवनों से नहीं, बल्कि उसकी कार्यसंस्कृति और जवाबदेही से बनती है, जो फिलहाल कमजोर होती दिख रही है।”छात्र संगठनों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाबदेही तय करने और कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि डिजिटल युग में भी बुनियादी शैक्षणिक सेवाओं के लिए छात्रों को परेशान होना दुर्भाग्यपूर्ण है।अब देखना यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या समय रहते ठोस कदम उठाकर विश्वविद्यालय की साख को बचाने में सफल हो पाता है या नहीं।
