सामाजिक क्रांति को समर्पित भारतीय समन्वय संगठन के तत्वाधान में सारनाथ से संकिसा तक शांतिपूर्ण धम्म यात्रा सम्पन्नहजारों बौद्ध अनुयायियों ने दिया करुणा, अहिंसा और समरसता का संदेश

फर्रुखाबाद/संकिसा। सामाजिक क्रांति को समर्पित *भारतीय समन्वय संगठन* के तत्वाधान में शुक्रवार को सारनाथ से संकिसा तक निकाली गई *शांतिपूर्ण धम्म यात्रा* ऐतिहासिक और प्रेरणादायक संदेश छोड़ते हुए सम्पन्न हुई। इस यात्रा में विभिन्न राज्यों और जनपदों से आए हजारों बौद्ध धर्मावलंबियों, भिक्षुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भाग लेकर समाज में समरसता, प्रेम और अहिंसा का संदेश दिया।धम्म यात्रा की शुरुआत सारनाथ के *धम्म चक्र स्तूप* परिसर से हुई, जहाँ भिक्षुओं ने त्रिरत्न वंदना, मंगल पाठ और धम्म संदेश के साथ इस आध्यात्मिक यात्रा का उद्घाटन किया। भारतीय समन्वय संगठन का उद्देश्य इस यात्रा के माध्यम से समाज में व्याप्त भेदभाव, हिंसा, तनाव और सामाजिक असमानताओं को समाप्त करने की दिशा में जागरूकता फैलाना रहा। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि बुद्ध का धम्म मार्ग ही वास्तविक सामाजिक क्रांति का आधार है, जो समानता, करुणा और न्याय पर आधारित है।पीले वस्त्र पहने अनुयायियों ने शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा प्रारंभ की। ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ और ‘जय भीम–जय भारत’ के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। महिलाएँ, पुरुष, बुजुर्ग और युवा सभी धम्म यात्रियों ने अनुशासनपूर्वक चलकर समाज को यह संदेश दिया कि परिवर्तन शांति से भी संभव है। यात्रा के मार्ग में स्थानीय नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर यात्रियों का स्वागत किया। कई बस्तियों में जलपान, कंबल, फल और चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था भी की गई, जिसे देखकर यात्रियों ने आयोजकों एवं ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया।यात्रा में शामिल भिक्षुओं ने मार्ग में कई स्थानों पर धम्म प्रवचन भी दिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक क्रांति का अर्थ केवल शासन परिवर्तन नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर की बुराइयों, भेदभाव और कट्टरता का अंत करना है। बौद्ध धम्म का वास्तविक संदेश मनुष्य को मनुष्य से जोड़ना है, न कि अलग करना। प्रवचनों में अहिंसा, करुणा, मैत्री, संयम, सत्य और समानता की सीख को प्रमुखता से रखा गया।संकिसा पहुँचने पर धम्म यात्रा का स्वागत बौद्ध संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर किया। संकिसा, भगवान बुद्ध के अवतरण स्थल के रूप में विश्वविख्यात है, इसलिए यहाँ पहुंचकर यात्रियों ने विशेष धम्म पूजा की। भिक्षुओं ने शांति एवं विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना की। भारतीय समन्वय संगठन द्वारा आयोजित समापन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम, धम्म गीत और दीपमालिका ने वातावरण को दिव्य बना दिया।संगठन के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि यह धम्म यात्रा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार और मानवता को नई दिशा देने का अभियान है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में इसे और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग बुद्ध के धम्म को समझें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।पूरी यात्रा के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमामय तरीके से सम्पन्न हुआ। सारनाथ से संकिसा तक की यह धम्म यात्रा सामाजिक क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, जिसने पूरे क्षेत्र में शांति और सद्भाव का संदेश प्रसारित किया।

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