सौरिख (कन्नौज)।
सौरिख कस्बे में आज हज़रत सैय्यद सलीम शाह रहमतुल्लाह अलैह, जिन्हें श्रद्धा से थाने वाले सैय्यद बाबा के नाम से जाना जाता है, का तीन दिवसीय उर्स पूरे अकीदत और उत्साह के साथ शुरू हो गया। उर्स का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. जितेंद्र यादव ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों, स्थानीय लोगों और सामाजिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही।
उर्स के उद्घाटन समारोह में डॉ. जितेंद्र यादव ने हज़रत सैय्यद सलीम शाह रहमतुल्लाह अलैह के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सूफी संतों ने हमेशा इंसानियत, प्रेम, आपसी भाईचारे और समाज में समानता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सद्भाव, शांति और गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूती मिलती है।
तीन दिवसीय इस उर्स में विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रमों में प्रमुख रूप से कव्वालियों का मुकाबला आकर्षण का केंद्र रहेगा, जिसमें देश के नामचीन कव्वाल अपने सूफियाना कलाम से समां बांधेंगे। इसके साथ ही कुल शरीफ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र की खुशहाली, अमन-चैन और तरक्की के लिए दुआएं मांगी जाएंगी।
उर्स के दौरान शायरों और साहित्य प्रेमियों की भव्य महफिल भी सजाई जा रही है। इस महफिल में शायर अपनी रचनाओं के माध्यम से मोहब्बत, इंसानियत और सामाजिक एकता का पैगाम देंगे। आयोजकों का कहना है कि यह महफिल गंगा-जमुनी तहज़ीब की सजीव मिसाल पेश करेगी, जहां हर मजहब और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर सूफी परंपरा का आनंद लेंगे।
उर्स में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन व आयोजन समिति की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दूर-दराज़ से आने वाले जायरीनों के लिए ठहरने, लंगर और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। पूरे कस्बे में उर्स को लेकर उत्सव जैसा माहौल है और हर ओर अकीदत व भाईचारे की झलक दिखाई दे रही है।
आयोजकों ने बताया कि उर्स का मुख्य उद्देश्य हज़रत सैय्यद सलीम शाह रहमतुल्लाह अलैह की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और समाज में प्रेम, सौहार्द व एकता के संदेश को और मजबूत करना है।

