BCI का बड़ा फैसला: गोवा में बनेगी National Legal Academy, वकीलों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की तैयारी

नई दिल्ली/गोवा। देश के कानूनी पेशे से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) गोवा स्थित India International University of Legal Education and Research (IIULER) के कैंपस में National Legal Academy स्थापित करने जा रहा है। BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने 9 अगस्त 2026 को IIULER के दीक्षारंभ कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की। ([Live Law][1])प्रस्तावित National Legal Academy का उद्देश्य अधिवक्ताओं के लिए नामांकन के बाद निरंतर और संरचित कानूनी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। BCI के अनुसार, देशभर के वकीलों को यहां प्रशिक्षण के लिए बुलाया जा सकता है और भविष्य में यह प्रशिक्षण अनिवार्य किए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रशिक्षण की अवधि लगभग 10 दिन से दो सप्ताह तक होने की संभावना बताई गई है। ([Bar and Bench – Indian Legal news][2])इस प्रशिक्षण में कानूनी पेशे में बदलती तकनीक और Artificial Intelligence यानी AI के उपयोग के साथ-साथ पेशेवर दक्षता, कानूनी नैतिकता और अधिवक्ताओं के Professional Standards पर भी जोर दिया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों और विषय विशेषज्ञों से प्रशिक्षण एवं संवाद की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।इस पहल की पृष्ठभूमि 7 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से जुड़ी है, जिसमें अदालत ने अधिवक्ताओं के लिए Continuing Legal Education यानी निरंतर कानूनी शिक्षा को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। अदालत ने कहा था कि नामांकन के बाद संरचित शिक्षा से वकीलों की पेशेवर क्षमता, नैतिक जागरूकता और तकनीकी अनुकूलन क्षमता मजबूत की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने BCI को National Legal Academy की स्थापना की दिशा में कदम उठाने और इस संबंध में वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ताओं तथा विशेषज्ञों की टीम गठित करने का निर्देश दिया था। मामले में आगे की सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित है। BCI चेयरमैन के अनुसार, गोवा स्थित IIULER कैंपस में प्रस्तावित अकादमी को National Judicial Academy, भोपाल की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य देशभर के अधिवक्ताओं को बदलते कानून, तकनीक, AI, पेशेवर आचरण और प्रभावी न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप लगातार प्रशिक्षित करना है।इस फैसले से देश के लाखों अधिवक्ताओं के लिए कानूनी पेशे में प्रशिक्षण और पेशेवर विकास का नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि प्रशिक्षण को सभी अधिवक्ताओं के लिए किस रूप में और कब अनिवार्य किया जाएगा, इसका अंतिम ढांचा अभी सामने आना बाकी है।सवाल यह है कि क्या बदलते कानून और AI जैसी नई तकनीकों के दौर में अधिवक्ताओं के लिए नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए? यह फैसला आने वाले समय में भारतीय कानूनी पेशे की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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