फर्रुखाबाद की 311वीं स्थापना वर्षगांठ पर सजा जश्न-ए-फर्रुखाबाद, इतिहास को संजोने का लिया गया संकल्प,


शासन और प्रशासन की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिखा।

फर्रुखाबाद। (SPK न्यूज़ 24) फर्रुखाबाद में आज शहर की स्थापना की 311वीं वर्षगांठ के अवसर पर जश्न-ए-फर्रुखाबाद का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नवाब मोहम्मद खान बंगस वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित हुआ, जिसमें शहर के इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में फर्रुखाबाद की भूमिका को याद किया गया। हालांकि इस ऐतिहासिक अवसर पर शासन और प्रशासन की सक्रिय भागीदारी न होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वतंत्रता सेनानी शहीद अशफाक उल्लाह खान के पौत्र अशफाक उल्लाह खान शामिल हुए। उनके आगमन पर उपस्थित लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि फर्रुखाबाद केवल एक शहर नहीं, बल्कि बलिदान, संघर्ष और देशभक्ति की पहचान है। उन्होंने कहा कि शहीदों और इतिहास को याद रखना किसी भी समाज की जिम्मेदारी होती है।

इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तहसीन सिद्दीकी, फर्रुखाबाद के पूर्व जिला अध्यक्ष नदीम अहमद फारूकी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजय यादव, यूनुस अंसारी सहित कई सामाजिक व राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। सभी वक्ताओं ने फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक विरासत और उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब पर प्रकाश डाला।

सभा को संबोधित करते हुए यूनुस अंसारी ने कहा,
“जो कौम अपनी तारीख़ को याद नहीं रखती, उनका इतिहास मिटा दिया जाता है।”
उन्होंने कहा कि फर्रुखाबाद का इतिहास गौरवशाली रहा है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि ऐसे ऐतिहासिक आयोजनों में शासन और प्रशासन की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी स्तर पर सहयोग मिले, तो इस तरह के कार्यक्रम और भी व्यापक रूप से आयोजित किए जा सकते हैं।

वक्ताओं ने मंच से यह सवाल भी उठाया कि शहर की स्थापना की 311वीं वर्षगांठ जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर न तो किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की उपस्थिति रही और न ही शासन स्तर से कोई सहयोग या संदेश देखने को मिला। उन्होंने इसे शहर की ऐतिहासिक विरासत के प्रति उदासीनता बताया।

पूर्व जिला अध्यक्ष नदीम अहमद फारूकी ने कहा कि फर्रुखाबाद की पहचान केवल वर्तमान से नहीं, बल्कि उसके अतीत से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे आयोजनों में भाग लेकर न केवल इतिहास को सम्मान दे, बल्कि नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ने का कार्य करे।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजय यादव ने भी प्रशासनिक सहयोग की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन और नगर प्रशासन इस तरह के आयोजनों में साथ दे, तो यह कार्यक्रम पूरे जिले का गौरव बन सकता है।

कार्यक्रम के दौरान फर्रुखाबाद की स्थापना, नवाब मोहम्मद खान बंगस के योगदान, स्वतंत्रता संग्राम में शहर की भूमिका और शहीद अशफाक उल्लाह खान के बलिदान को विस्तार से याद किया गया। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को पूरी तरह सामाजिक सहयोग से सफल बताया।

हालांकि आयोजन भव्य और भावनात्मक रहा, लेकिन लोगों में यह टीस साफ दिखाई दी कि इतिहास को सहेजने की जिम्मेदारी केवल समाज के कंधों पर छोड़ दी गई है, जबकि शासन और प्रशासन की भागीदारी बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि वे आगे भी जश्न-ए-फर्रुखाबाद का आयोजन करते रहेंगे, चाहे उन्हें सरकारी सहयोग मिले या न मिले। साथ ही यह उम्मीद भी जताई गई कि आने वाले वर्षों में शासन और प्रशासन फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने के लिए आगे आएगा।

फर्रुखाबाद की 311वीं स्थापना वर्षगांठ पर आयोजित यह जश्न इतिहास के प्रति सम्मान और व्यवस्था के प्रति सवाल — दोनों को साथ लेकर सामने आया।

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